गीता जी की शिक्षा के क्षेत्र में भूमिका
अंधकार को दूर कर जो प्रकाश फैला दे… अंधकार को दूर कर जो प्रकाश फैला दे, बुझी हुई आस में […]
अंधकार को दूर कर जो प्रकाश फैला दे… अंधकार को दूर कर जो प्रकाश फैला दे, बुझी हुई आस में […]
भारतीय विचार में शिक्षा का उद्देश्य भारतीय विचार में शिक्षा का उद्देश्य सदैव कल्याणकारी समाज के लिए संवेदनशील, बुद्धिमान, तार्किक,
विश्व कल्याण एवं मानव मात्र के व्यक्तित्व-विकास के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य ज्ञान एक अमूल्य निधि है। यह सम्पूर्ण वेदों
पृथ्वी को नरक से स्वर्ग बनाना सिखाती है गीता आज मानव जाति पर्यावरण असंतुलन, आर्थिक संकट, जातिवाद, आतंकवाद, बढ़ती जनसंख्या,
अनासक्त भाव से करें मतदान योगीराज श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में कहा है कि वे उदासीन की भाँति स्थित रहते हुए
कल सायंकाल विज्ञान भवन में आयोजित एक अद्वितीय कार्यक्रम “गीता जीवन गीत” सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम जीओ गीता द्वारा
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में नेतृत्व और प्रबंधन को सीखने-सिखाने पर सर्वाधिक चिंतन एवं शोध हो रहे हैं। प्राचीन भारतीय वाङ्मय
शांति और सद्भाव किसी भी देश की बुनियादी आवश्यकता हैं। देश के नागरिक तभी स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सकते
आज के वातावरण में गीता का यह संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है, जब हम अपने से श्रेष्ठ
श्रीभगवानुवाच— अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः।दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम्॥ 16.1॥ कृष्ण कहते हैं— अन्तःकरण की शुद्धि। यही अन्तःकरण है जिसके साथ अनेक