विश्वकर्मा और श्रीमद्भगवद्गीता
हाथों में हुनर, कर्म में कौशल और सृजन में लोककल्याण जब हम भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करते हैं तो हमारे […]
हाथों में हुनर, कर्म में कौशल और सृजन में लोककल्याण जब हम भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करते हैं तो हमारे […]
जब प्रतीक बन जाएँ जीवन-दर्शन — विघ्न से विवेक तक की यात्रा गणेशोत्सव को केवल पूजा, आरती और मंगलकामनाओं तक
कुरुक्षेत्र का युद्ध समाप्त हुए हजारों वर्ष बीत चुके हैं, परंतु मनुष्य का आंतरिक संघर्ष आज भी समाप्त नहीं हुआ।
ज्ञान, त्याग और लोकसंग्रह के गीता-योद्धा ज्ञान, त्याग और लोकसंग्रह के गीता-योद्धा विद्या तभी सार्थक है, जब वह समाज और
राष्ट्रचेतना, धर्म और वैचारिक क्रांति के गीता-योद्धा “स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।”— भगवद्गीता 3.35 भूमिका जब विचार क्रांति की नींव
धैर्य, दूरदृष्टि और मौन कर्मयोग के गीता-योद्धा “कुछ लोग इतिहास बनाते हैं, कुछ लोग इतिहास बनाने वालों को तैयार करते
आत्मबल, आत्मसंयम और अडिग संकल्प के गीता-योद्धा “दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे,आज़ाद ही रहे हैं, आज़ाद ही रहेंगे।”
शुद्ध एवं संशोधित पाठ ज्ञान, विवेक और निर्भय कर्तव्य के गीता-योद्धा “क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती
कर्मयोग, स्वधर्म और अदम्य नेतृत्व के गीता-योद्धा “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।” “नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म