अध्याय 3
वीर विनायक दामोदर सावरकर अभय, स्वधर्म और अदम्य संकल्प के गीता-योद्धा अभय, स्वधर्म और अदम्य संकल्प के गीता-योद्धा “जो राष्ट्र […]
कर्मयोग, स्वधर्म और अदम्य नेतृत्व के गीता-योद्धा “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।” “नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म
भारत का स्वतंत्रता संग्राम विश्व इतिहास का एक अद्वितीय अध्याय है। यह केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन का आंदोलन नहीं था,
अभय निर्भयता नहीं है, क्योंकि निर्भय तो आसुरी संपदा वाले लोग भी होते हैं अभय शब्द सुनते ही हमें जो
ज्ञानयोग में निरंतर दृढ़ स्थिति : दैवी संपदा का तृतीय गुण जिसे हम अवेयरनेस कहते हैं, महावीर ने जिसे सम्यक
हमेशा अपने संग रखते थे गीता अपने प्रवचनों में करते थे गीता के श्लोकों का उल्लेख स्वामी विवेकानंद जयंती पर
ध्यान है आंतरिक शांति, स्पष्टता और आध्यात्मिक विकास का मार्ग अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिवस पर विशेष आज की तेज रफ्तार जिंदगी
मीन्स और मेंटर में हमेशा मेंटर का करें चुनाव (गुरु पूर्णिमा पर विशेष) वैदिक काल से ही भारत में गुरु-शिष्य
हमारा अहंकार हमारे भीतर की कमजोरी को छिपाता है जीवन को दो प्रकार से देखा जा सकता है। पहला दृष्टिकोण