Geeta

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संघर्ष समाधान की एक अद्वितीय पुस्तक है गीता

दूसरे अध्याय के 34वें श्लोक में भगवान कहते हैं— अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्।सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते॥ 2.34॥ अर्थात् लोग तुम्हें कायर

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विशुद्ध भक्ति देती है ब्रह्म पद पाने की शक्ति — गीता

14वें अध्याय के 26वें श्लोक में भगवान कहते हैं— मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते।स गुणान्समतीत्यैतान्ब्रह्मभूयाय कल्पते॥ अर्थात् जो लोग विशुद्ध

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यथोचित समय, स्थान में सुपात्र को दिया गया दान सात्त्विक होता है।

सुखमात्यन्तिकं यत्तद् बुद्धिग्राह्यमतीन्द्रियम्। वेत्ति यत्र न चैवायं स्थितश्चलति तत्त्वतः।। (6.21)     यं लब्ध्वा चापरं लाभं मन्यते नाधिकं ततः। यस्मिन्स्थितो

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