Author name: Dr Markanday Ahuja

Geeta

भावनात्मक बुद्धिमत्ता का सजीव कोश है भगवद्गीता

(भाग–दो) भावनात्मक बुद्धिमत्ता का सजीव कोश है भगवद्गीता (भाग–दो) आत्म-नियमन या भावनात्मक आत्म-नियंत्रण आत्म-नियमन किसी भी व्यक्ति की अपनी भावनाओं,

Geeta

प्रतिस्पर्धी एवं चुनौतीपूर्ण व्यावसायिक प्रबंधन में भी कारगर है गीता।

कार्य के प्रति समर्पण एवं कार्यकुशलता की मानसिक क्रांति का उद्घोष करती है गीता आज विश्व के वही देश समृद्धि

Scroll to Top