प्रतिस्पर्धी एवं चुनौतीपूर्ण व्यावसायिक प्रबंधन में भी कारगर है गीता।
कार्य के प्रति समर्पण एवं कार्यकुशलता की मानसिक क्रांति का उद्घोष करती है गीता आज विश्व के वही देश समृद्धि […]
कार्य के प्रति समर्पण एवं कार्यकुशलता की मानसिक क्रांति का उद्घोष करती है गीता आज विश्व के वही देश समृद्धि […]
नकारात्मक भावनाओं से युद्ध करना सिखाती है गीता महात्मा गांधी भगवद्गीता को अपनी ‘माँ’ और आध्यात्मिक ज्ञान का विश्वकोष मानते
“थके न तू, रुके न तू, शीश यह झुके न यूँ।मन में एक विश्वास जगा, दृढ़ यह संकल्प कर, निश्चय
जब मनुष्य बिना आसक्ति के कार्य करता है, तब वह आकुलता, भय, आशंका और अधीरता से मुक्त होकर अत्यधिक कुशलता
मेरे लिए श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक ग्रंथ नहीं है। मैं कह सकता हूँ कि यह स्नातक, स्नातकोत्तर या डॉक्टरेट
भारत में अभी-अभी चुनाव सम्पन्न हुए हैं। चुनाव लोकतंत्र का मुख्य आधार हैं। वे केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं,
स्वामी विवेकानंद ने कहा था— “मैं मन की एकाग्रता को ही शिक्षा का वास्तविक सार मानता हूँ, न कि केवल
भगवद्गीता का अत्यंत चर्चित, प्रसिद्ध, चिंतनशील एवं अनुकरणीय श्लोक दूसरे अध्याय का 47वाँ श्लोक है— कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा
जिज्ञासा के प्रथम स्वर की ध्वनि के गूँजायमान होते ही भीतर और बाहर का स्वर स्पष्ट, सात्त्विक और पवित्र हो
कुरुक्षेत्र स्थित जीओ गीता द्वारा संचालित गीता ज्ञान संस्थान की ओर से आयोजित सात दिवसीय गीता महोत्सव का आयोजन 19