






Dr. Markanday Ahuja
Dr. Ahuja is an excellent orator, avid reader and meticulous writer. He has written over 20 books.
Key Highlights
प्रकाशन
गुरु-शिष्य परंपरा का चरमोत्कर्ष मोक्ष-प्राप्ति…
मीन्स और मेंटर में हमेशा मेंटर का करें चुनाव (गुरु पूर्णिमा पर विशेष) वैदिक काल से ही भारत में गुरु-शिष्य […]
अहंकार अज्ञानता की निशानी है।
हमारा अहंकार हमारे भीतर की कमजोरी को छिपाता है जीवन को दो प्रकार से देखा जा सकता है। पहला दृष्टिकोण […]
अर्जुन के चित्त की दशा…
द्वंद्वात्मक स्थिति से उबारने का शास्त्र है गीता यदि मन एकाग्र हो, तो संकल्प संगठित और शक्तिशाली बन जाता है। […]
मुश्किलों में मुस्कुराना सीखें भगवान…
मुश्किलों में मुस्कुराना सीखें भगवान श्रीकृष्ण से गीता के द्वितीय अध्याय के नौवें श्लोक में संजय कहते हैं— एवमुक्त्वा हृषीकेशं […]
भगवान श्रीकृष्ण से भी जुड़ा…
भगवान श्रीकृष्ण से भी जुड़ा है दीपावली का त्योहार दीपावली से एक दिन पूर्व नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण […]
धीर पुरुष मुक्ति का पात्र…
विजय की घोषणा से पहले उत्कृष्ट प्रदर्शन को ही विजय मान लेना कई बार निराशा का कारण बनता है कर्मयोग […]
गीता में समस्याओं का पूर्वानुमान…
गीता की प्रेरणाएँ शाश्वत हैं : जीवन के साथ भी, जीवन के बाद भी हाल ही में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी […]
भगवान की अनुभूति का पहला…
जैसे दूध में मक्खन है, उसी प्रकार भगवान भी सर्वत्र हैं गीता के नौवें अध्याय के तीसरे श्लोक में भगवान […]
अशांति के समुद्र में शांति…
मानसिक स्वास्थ्य की अचूक ‘थेरेपी’ है गीता गीता ऐसा दिव्य ग्रंथ है, जो मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य के लगभग सभी […]
अनासक्ति हमारा स्वभाव है :…
अनासक्ति विरक्ति नहीं है अक्सर लोग अनासक्ति का अर्थ विरक्ति समझ लेते हैं, जबकि अनासक्ति विरक्ति नहीं है। वास्तव में […]
गीता की अंतर्दृष्टि और न्यूरोसाइंटिस्टों…
जब भगवान श्रीकृष्ण विरक्ति, अनासक्ति अथवा मोह-मुक्त होकर कर्म करने की सलाह देते हैं, तो आधुनिक तंत्रिका-विज्ञान (Neuroscience) की भाषा […]
भावनात्मक बुद्धिमत्ता का सजीव कोश…
भाग–6 : विनम्रता विनम्रता का अर्थ है—विनीत होना, अपनी क्षमताओं और सीमाओं के प्रति यथार्थवादी दृष्टिकोण रखना तथा दूसरों के […]
