






Dr. Markanday Ahuja
Dr. Ahuja is an excellent orator, avid reader and meticulous writer. He has written over 20 books.
Key Highlights
प्रकाशन
गीता का नवनीत है अनासक्ति…
अनासक्त भाव से करें मतदान योगीराज श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में कहा है कि वे उदासीन की भाँति स्थित रहते हुए […]
गीता जयंती पर एक मिनट,…
कल सायंकाल विज्ञान भवन में आयोजित एक अद्वितीय कार्यक्रम “गीता जीवन गीत” सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम जीओ गीता द्वारा […]
परस्पर सामंजस्य नेतृत्व का आवश्यक…
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में नेतृत्व और प्रबंधन को सीखने-सिखाने पर सर्वाधिक चिंतन एवं शोध हो रहे हैं। प्राचीन भारतीय वाङ्मय […]
विश्व शांति और सद्भाव में…
शांति और सद्भाव किसी भी देश की बुनियादी आवश्यकता हैं। देश के नागरिक तभी स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सकते […]
जो जो श्रेष्ठ लोग करते…
आज के वातावरण में गीता का यह संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है, जब हम अपने से श्रेष्ठ […]
शुद्ध अंतःकरण से ही दिव्यता…
श्रीभगवानुवाच— अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः।दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम्॥ 16.1॥ कृष्ण कहते हैं— अन्तःकरण की शुद्धि। यही अन्तःकरण है जिसके साथ अनेक […]
प्राणियों के कल्याण से मिलता…
भगवद्गीता के पाँचवें अध्याय के 25वें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं— लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः।छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः।। (5.25) अर्थात् […]
मातृ-आश्वासन प्रदान करते हैं कृष्ण।
एक माँ अपने नवजात, असहाय शिशु को त्यागने के बारे में कभी नहीं सोचती, क्योंकि वह पूर्णतः उसी पर निर्भर […]
गीता में हैं शाश्वत गारंटियाँ।
हाल ही में पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए। चुनावी सभाओं और भाषणों में हमने देखा कि लगभग हर […]
स्वभाव से स्वधर्म की यात्रा…
‘थ्री इडियट्स’ और भगवद्गीता का संदेश ‘थ्री इडियट्स’ दो दोस्तों—माधवन और शरमन जोशी—की अपने खोए हुए मित्र की तलाश की […]
भगवान का दिव्य प्रसाद है…
श्रीमद्भगवद्गीता, जिसे आदर और सम्मान के साथ गीतोपनिषद् भी कहा जाता है, भारतीय धर्म, दर्शन और अध्यात्म का अनूठा सार […]
अपनी प्रकृति से उत्पन्न कर्तव्यों…
सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत्।सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृताः॥ (गीता 18.48) अर्थात् किसी भी व्यक्ति को अपनी प्रकृति से उत्पन्न […]
