रासबिहारी बोस
धैर्य, दूरदृष्टि और मौन कर्मयोग के गीता-योद्धा “कुछ लोग इतिहास बनाते हैं, कुछ लोग इतिहास बनाने वालों को तैयार करते […]
धैर्य, दूरदृष्टि और मौन कर्मयोग के गीता-योद्धा “कुछ लोग इतिहास बनाते हैं, कुछ लोग इतिहास बनाने वालों को तैयार करते […]
आत्मबल, आत्मसंयम और अडिग संकल्प के गीता-योद्धा “दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे,आज़ाद ही रहे हैं, आज़ाद ही रहेंगे।”
शुद्ध एवं संशोधित पाठ ज्ञान, विवेक और निर्भय कर्तव्य के गीता-योद्धा “क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती
कर्मयोग, स्वधर्म और अदम्य नेतृत्व के गीता-योद्धा “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।” “नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म
भारत का स्वतंत्रता संग्राम विश्व इतिहास का एक अद्वितीय अध्याय है। यह केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन का आंदोलन नहीं था,
अभय निर्भयता नहीं है, क्योंकि निर्भय तो आसुरी संपदा वाले लोग भी होते हैं अभय शब्द सुनते ही हमें जो
ज्ञानयोग में निरंतर दृढ़ स्थिति : दैवी संपदा का तृतीय गुण जिसे हम अवेयरनेस कहते हैं, महावीर ने जिसे सम्यक
हमेशा अपने संग रखते थे गीता अपने प्रवचनों में करते थे गीता के श्लोकों का उल्लेख स्वामी विवेकानंद जयंती पर