सेवक नेतृत्व के आदि प्रवर्तक हैं भगवान कृष्ण
लोकतंत्र के महापर्व में जोश से नहीं, होश से काम करने का समय भारत लोकतंत्र का महापर्व मना रहा है। […]
लोकतंत्र के महापर्व में जोश से नहीं, होश से काम करने का समय भारत लोकतंत्र का महापर्व मना रहा है। […]
दूसरे अध्याय के 34वें श्लोक में भगवान कहते हैं— अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्।सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते॥ 2.34॥ अर्थात् लोग तुम्हें कायर