Geeta

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जीवन के छिपे खजाने को खोजने की कुंजी है गीता।

गीता के 16वें अध्याय के दूसरे श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं— “अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम्।दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम्।।” (16.2) अर्थात्

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परस्पर सहयोग ही सभी के सुख-समृद्धि की गारंटी है : गीता

तीसरे अध्याय के ग्यारहवें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं— देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः।परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ॥ अर्थात् तुम्हारे

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संघर्ष समाधान की एक अद्वितीय पुस्तक है गीता

दूसरे अध्याय के 34वें श्लोक में भगवान कहते हैं— अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्।सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते॥ 2.34॥ अर्थात् लोग तुम्हें कायर

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विशुद्ध भक्ति देती है ब्रह्म पद पाने की शक्ति — गीता

14वें अध्याय के 26वें श्लोक में भगवान कहते हैं— मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते।स गुणान्समतीत्यैतान्ब्रह्मभूयाय कल्पते॥ अर्थात् जो लोग विशुद्ध

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