क्रोध प्रबंधन एवं गीता
क्रोध प्रबंधन (Anger Management) एक प्रकार की परामर्श प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने स्वास्थ्य, कार्य, व्यवहार तथा व्यक्तिगत […]
क्रोध प्रबंधन (Anger Management) एक प्रकार की परामर्श प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने स्वास्थ्य, कार्य, व्यवहार तथा व्यक्तिगत […]
सभी प्राणियों में समानता सिखाती है गीता समानता एक बहुआयामी अवधारणा है, जो पूरे इतिहास में गहन बहस और विश्लेषण
गीता के दूसरे अध्याय के 15वें श्लोक में भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं— यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ।समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय
22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हो रही है। इस विषय का स्मरण मात्र ही मन को
गीता के 16वें अध्याय के दूसरे श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं— “अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम्।दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम्।।” (16.2) अर्थात्
तीसरे अध्याय के ग्यारहवें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं— देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः।परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ॥ अर्थात् तुम्हारे
Add Your Heading Text Here हिंदू आस्था में अपने महत्व के साथ-साथ, भगवद्गीता ने संत ज्ञानेश्वर, महर्षि अरविंद, स्वामी विवेकानंद,
लोकतंत्र के महापर्व में जोश से नहीं, होश से काम करने का समय भारत लोकतंत्र का महापर्व मना रहा है।
दूसरे अध्याय के 34वें श्लोक में भगवान कहते हैं— अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्।सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते॥ 2.34॥ अर्थात् लोग तुम्हें कायर
यहाँ आपका पाठ शुद्ध हिंदी, सही मात्राओं और विराम-चिह्नों के साथ संशोधित किया गया है (प्रारंभिक भाग): दूसरे अध्याय के