गीता में हैं शाश्वत गारंटियाँ।
हाल ही में पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए। चुनावी सभाओं और भाषणों में हमने देखा कि लगभग हर […]
हाल ही में पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए। चुनावी सभाओं और भाषणों में हमने देखा कि लगभग हर […]
‘थ्री इडियट्स’ और भगवद्गीता का संदेश ‘थ्री इडियट्स’ दो दोस्तों—माधवन और शरमन जोशी—की अपने खोए हुए मित्र की तलाश की
श्रीमद्भगवद्गीता, जिसे आदर और सम्मान के साथ गीतोपनिषद् भी कहा जाता है, भारतीय धर्म, दर्शन और अध्यात्म का अनूठा सार
सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत्।सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृताः॥ (गीता 18.48) अर्थात् किसी भी व्यक्ति को अपनी प्रकृति से उत्पन्न
गीता के 16वें अध्याय के चौथे श्लोक में भगवान् कहते हैं— दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव च।अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम्॥ 16.4॥
एक जीवित चेतना का मूल गुण असंमोह, अर्थात् संशय और भ्रम से मुक्त होना है (गीता 10.4)। किंतु आज के
विनम्रता मनुष्य के व्यक्तित्व का आभूषण है। इसके माध्यम से हमारा व्यक्तित्व सुंदर और प्रभावशाली बनता है, क्योंकि विनम्र होकर
भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। भगवान विष्णु ने ही त्रेतायुग में श्रीराम के रूप में
क्रोध प्रबंधन (Anger Management) एक प्रकार की परामर्श प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने स्वास्थ्य, कार्य, व्यवहार तथा व्यक्तिगत
सभी प्राणियों में समानता सिखाती है गीता समानता एक बहुआयामी अवधारणा है, जो पूरे इतिहास में गहन बहस और विश्लेषण