अध्याय 1
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल निष्काम कर्म, निर्भयता और आत्मा की अमरता के अमर साधक! यदि भगवद्गीता का यह संदेश—“कर्म करो, […]
भारत का स्वतंत्रता संग्राम विश्व इतिहास का एक अद्वितीय अध्याय है। यह केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन का आंदोलन नहीं था,
अभय निर्भयता नहीं है, क्योंकि निर्भय तो आसुरी संपदा वाले लोग भी होते हैं अभय शब्द सुनते ही हमें जो
ज्ञानयोग में निरंतर दृढ़ स्थिति : दैवी संपदा का तृतीय गुण जिसे हम अवेयरनेस कहते हैं, महावीर ने जिसे सम्यक
हमेशा अपने संग रखते थे गीता अपने प्रवचनों में करते थे गीता के श्लोकों का उल्लेख स्वामी विवेकानंद जयंती पर
ध्यान है आंतरिक शांति, स्पष्टता और आध्यात्मिक विकास का मार्ग अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिवस पर विशेष आज की तेज रफ्तार जिंदगी
मीन्स और मेंटर में हमेशा मेंटर का करें चुनाव (गुरु पूर्णिमा पर विशेष) वैदिक काल से ही भारत में गुरु-शिष्य
हमारा अहंकार हमारे भीतर की कमजोरी को छिपाता है जीवन को दो प्रकार से देखा जा सकता है। पहला दृष्टिकोण
द्वंद्वात्मक स्थिति से उबारने का शास्त्र है गीता यदि मन एकाग्र हो, तो संकल्प संगठित और शक्तिशाली बन जाता है।
मुश्किलों में मुस्कुराना सीखें भगवान श्रीकृष्ण से गीता के द्वितीय अध्याय के नौवें श्लोक में संजय कहते हैं— एवमुक्त्वा हृषीकेशं