Author name: Dr Markanday Ahuja

Geeta

जीवन के छिपे खजाने को खोजने की कुंजी है गीता।

गीता के 16वें अध्याय के दूसरे श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं— “अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम्।दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम्।।” (16.2) अर्थात्

Geeta

परस्पर सहयोग ही सभी के सुख-समृद्धि की गारंटी है : गीता

तीसरे अध्याय के ग्यारहवें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं— देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः।परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ॥ अर्थात् तुम्हारे

Geeta

संघर्ष समाधान की एक अद्वितीय पुस्तक है गीता

दूसरे अध्याय के 34वें श्लोक में भगवान कहते हैं— अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्।सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते॥ 2.34॥ अर्थात् लोग तुम्हें कायर

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